आलू भंडारण शुल्क सहायता योजना क्या है
आलू की फसल के बाद किसान उसे निजी कोल्ड स्टोरेज में रखते हैं और इसके लिए भंडारण शुल्क देते हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस खर्च का बोझ कम करने के लिए यह अनुदान योजना शुरू की है। सहायता की राशि आधार से जुलेखड़े बैंक खाते में DBT के ज़रिए सीधे भेजी जाती है। आवेदन उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के ऑनलाइन आलू किसान पोर्टल पर होता है।
यह योजना आलू किसानों के लिए लाई गई तीन योजनाओं में से एक बताई गई है। इनमें भाव गिरने पर मदद देने वाला ₹1000 करोड़ का भामाशाह भाव स्थिरता कोष भी शामिल है।
योजना की मुख्य बातें
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बिंदु |
विवरण |
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योजना का नाम |
आलू भंडारण शुल्क (प्रभार) सहायता / अनुदान योजना |
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लागू राज्य |
उत्तर प्रदेश |
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सहायता की दर |
₹100 प्रति क्विंटल |
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अधिकतम सहायता |
₹20,000 प्रति किसान (लगभग 200 क्विंटल तक) |
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किसके लिए |
निजी कोल्ड स्टोरेज में आलू रखने वाले किसान |
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भुगतान का तरीका |
आधार सीडेड बैंक खाते में DBT |
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आवेदन |
ऑनलाइन, potato.uphorticulture.in पर |
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विभाग |
उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग, उत्तर प्रदेश |
पात्रता: किसे मिलेगा लाभ
• आवेदक उत्तर प्रदेश का आलू किसान होना चाहिए।
• आलू निजी कोल्ड स्टोरेज में रखा होना चाहिए। जिला उद्यान अधिकारी के अनुसार लाभ केवल निजी शीतगृह में आलू रखने वालों को मिलेगा।
• किसान के पास खसरा-खतौनी में आलू के रोपित क्षेत्रफल का रिकॉर्ड होना चाहिए।
• बैंक खाता आधार से जुड़ा (सीडेड) होना चाहिए।
• भंडारण पर्ची (कोल्ड स्टोरेज रसीद) किसान के पास होनी चाहिए।
कितनी सहायता मिलेगी
सहायता ₹100 प्रति क्विंटल के हिसाब से तय होती है और ₹20,000 पर रुक जाती है। कोल्ड स्टोरेज में रखे आलू के अनुसार संभावित राशि नीचे दी गई है।
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कोल्ड स्टोरेज में आलू |
संभावित सहायता |
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50 क्विंटल |
₹5,000 |
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100 क्विंटल |
₹10,000 |
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150 क्विंटल |
₹15,000 |
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200 क्विंटल |
₹20,000 |
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250 क्विंटल या अधिक |
अधिकतम ₹20,000 |
ये राशि अनुमानित है। अंतिम भुगतान विभागीय सत्यापन के बाद ही तय होता है।
आवश्यक दस्तावेज
• फोटोयुक्त वैध पहचान पत्र और आधार कार्ड की कॉपी
• मोबाइल नंबर
• बैंक पासबुक और चेकबुक की कॉपी (खाताधारक का नाम, खाता संख्या और IFSC स्पष्ट दिखे)
• खसरा-खतौनी या भूमि/स्वामित्व का विवरण, जिसमें आलू का रोपित क्षेत्रफल दर्ज हो
• निजी कोल्ड स्टोरेज की भंडारण पर्ची / रसीद
• आलू की निकासी का प्रमाण पत्र (इसे जमा करने के बाद ही किसान अनुदान के लिए पात्र माना जाता है)
ऑनलाइन आवेदन कैसे करें
1. पोर्टल खोलें: उद्यान विभाग के आलू किसान पोर्टल potato.uphorticulture.in पर जाएँ।
2. पंजीकरण करें: किसान के रूप में अपना पंजीकरण पूरा करें।
3. भंडारित आलू की घोषणा करें: कोल्ड स्टोरेज में रखे आलू की मात्रा और भंडारण विवरण भरें।
4. दस्तावेज अपलोड करें: ऊपर बताए गए दस्तावेज स्पष्ट स्कैन या फोटो में जोड़ें।
5. सत्यापन: विभाग खसरा-खतौनी और भंडारण रसीद के आधार पर जाँच करता है।
6. निकासी प्रमाण और भुगतान: आलू निकालने का प्रमाण देने के बाद अनुदान की राशि DBT से बैंक खाते में आती है।
महत्वपूर्ण सूचना: समय-सीमा का ध्यान रखें
यदि आपका आलू अभी कोल्ड स्टोरेज में रखा है और आप उसे निकालने वाले हैं, तो आवेदन का समय पहले से ध्यान में रखें। योजना के प्रचार पोस्टर में लिखा है कि आलू निकालने से लगभग 3 दिन पहले आवेदन करना है। अंतिम तिथि और सटीक नियम अपने जिला उद्यान कार्यालय या पोर्टल से ज़रूर पक्का कर लें।
भामाशाह भाव स्थिरता कोष क्या अलग योजना है
हाँ। भंडारण शुल्क सहायता और भाव स्थिरता कोष दोनों एक ही पोर्टल से जुड़ी अलग-अलग योजनाएँ हैं। भाव स्थिरता कोष बाज़ार में आलू का भाव गिरने पर किसानों को राहत देने के लिए है, जबकि भंडारण शुल्क सहायता केवल निजी कोल्ड स्टोरेज के खर्च पर मिलती है। दोनों के नियम और दरें अलग हैं, इसलिए पोर्टल पर अपनी स्थिति अलग से जाँचें।
सावधानियाँ / नियम
• आवेदन केवल आधिकारिक पोर्टल potato.uphorticulture.in पर ही करें। किसी एजेंट या अनजान लिंक को OTP, आधार या बैंक विवरण न दें।
• खसरा-खतौनी, आधार और बैंक खाते का नाम एक जैसा होना चाहिए। अंतर होने पर सत्यापन अटक सकता है।
• बैंक खाता आधार से सीडेड और चालू होना चाहिए, वरना DBT भुगतान रुक सकता है।
• कोल्ड स्टोरेज की रसीद संभालकर रखें। आलू निकालने के बाद निकासी प्रमाण लेना न भूलें।
• अंतिम निर्णय और भुगतान विभागीय सत्यापन पर निर्भर है। इस को सरकारी आदेश का विकल्प न समझें।